फुरकान अंसारी, संवाददाता।

हरिद्वार/लक्सर। ईद मिलन जैसे सामाजिक कार्यक्रम इस बार लक्सर की राजनीति में खास मायने लेकर सामने आए। इकराम हसन बसेड़ी के आवास पर आयोजित कार्यक्रम उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का अचानक आगमन हुआ। इस अप्रत्याशित उपस्थिति ने कार्यक्रम को महज सामाजिक आयोजन से आगे बढ़ाकर एक बड़े सियासी संदेश में बदल दिया।
कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़, खासकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी, यह संकेत दे गई कि क्षेत्र में नए राजनीतिक विकल्पों को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। भाईचारे और एकता के इस मंच ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
इसी बीच, लक्सर के विधायक मोहम्मद शाहजाद द्वारा आयोजित ईद मिलन कार्यक्रम भी शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। जिलेभर से जुटाई गई भीड़ के जरिए उन्होंने अपने जनाधार को मजबूती से प्रस्तुत करने की कोशिश की। हालांकि, बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या स्थानीय नेतृत्व को अब अकेले ही मैदान संभालना पड़ रहा है।
लक्सर की राजनीति में दलित और मुस्लिम वोट बैंक हमेशा निर्णायक रहा है। ऐसे में सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की सक्रियता को इस समीकरण में नई और प्रभावशाली एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें 2027 के चुनाव में संभावित “गेम चेंजर” बना सकती है।
स्थानीय स्तर पर इकराम हसन बसेड़ी की बढ़ती सक्रियता भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रही है। जनसमस्याओं को लेकर उनकी लगातार पहल और क्षेत्र में मजबूत पकड़ उन्हें एक उभरते हुए प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित कर रही है। ऐसे में उनके मंच पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की मौजूदगी भविष्य के नए सियासी समीकरणों का संकेत मानी जा रही है।
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा,
“हमारा उद्देश्य समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना है। लक्सर की जनता में बदलाव की इच्छा साफ दिख रही है। युवा अब अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक हो चुके हैं, और यही बदलाव आने वाले चुनावों में दिखाई देगा।”
वहीं विधायक मोहम्मद शाहजाद ने अपने कार्यक्रम में कहा,
“ईद मिलन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक है। लक्सर की जनता हमेशा हमारे साथ रही है और हम विकास कार्यों के जरिए उनके विश्वास पर खरा उतरते रहेंगे।”
सूत्रों के मुताबिक, सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के संपर्क में क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली नेता भी हैं, जो आने वाले समय में नई राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं। यदि यह समीकरण मजबूत होता है, तो इसका असर सिर्फ लक्सर ही नहीं बल्कि आसपास की सीटों पर भी देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष:
एक साधारण दिखने वाला ईद मिलन कार्यक्रम इस बार लक्सर की राजनीति में बड़ा संदेश देकर गया है। जहां एक ओर पारंपरिक दल अपने जनाधार को बनाए रखने में जुटे हैं, वहीं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब सबकी नजरें 2027 के चुनाव पर टिकी हैं-जहां तय होगा कि असली “गेम चेंजर” कौन बनता है।

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