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Bageshwar Ki Brown Barfi : भारत में जगह कोई भी हो, कोई न कोई खास पकवान उसकी पहचान से जुड़ ही जाता है. मिठाई की तो बात ही निराली है. उत्तराखंड की कई जगहों के साथ भी ऐसे ही कनेक्शन देखने को मिलते हैं. कुमाऊं की मिठाइयों का नाम आते ही अल्मोड़ा की बाल मिठाई और सिंघौड़ी का जिक्र सबसे पहले होता है. बागेश्वर में इन दिनों ब्राउन बर्फी का जलवा देखने को मिल रहा है. 

बागेश्वर. उत्तराखंड में कुमाऊं की मिठाइयों का नाम आते ही अल्मोड़ा की बाल मिठाई और सिंघौड़ी का जिक्र सबसे पहले आता है. इन दोनों मिठाइयों की पहचान पूरे देश में है, लेकिन अब बागेश्वर पहुंचने वाले यात्रियों के बीच एक नई स्थानीय मिठाई तेजी से लोकप्रिय हो रही है, नाम है ब्राउन बर्फी. शहर के बस स्टेशन के पास स्थित राणा स्वीट्स समेत अन्य दुकानों में इसे देशी तरीके से बनाया जाता है. इसकी चर्चा न सिर्फ बागेश्वर तक सीमित है बल्कि आसपास के जिलों और यात्रियों के बीच भी तेजी से फैल रही है. ग्राहक महिपाल सिंह दोसाद बताते हैं कि ब्राउन बर्फी की खासियत इसे बनाने का पारंपरिक और देसी तरीका है. इसे ताजा भैंस के दूध से बने खोया, धीमी आंच और शुद्ध देसी घी में पकाकर तैयार किया जाता है. इसे लगातार धीमी आंच पर घंटों तक पकाया जाता है, जब तक कि इसका रंग गहरा भूरा न हो जाए और खास सुगंध न निकलने लगे. दूध की यह कैरामेलाइज्ड गुणवत्ता ही इसे सामान्य बर्फी से बिल्कुल अलग स्वाद देती है.

कितने रुपये किलो

यह बर्फी रोज ताजी तैयार होती है. इसके स्वाद को बनाए रखने के लिए किसी भी तरह के प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. यही वजह है कि लोग इसे देसीपन की असली मिठास कहते हैं. दुकान में सुबह जैसे ही बर्फी तैयार होती है, वैसे ही स्थानीय लोग और यात्री खरीदने पहुंच जाते हैं. छुट्टियों, हफ्ते के खत्म होने वाले दिनों और त्योहारों के मौसम में तो यहां खास भीड़ उमड़ती है. इस मिठाई की कीमत 440 रुपये किलो रखी गई है, जो शुद्ध दूध और घी से बनी प्रीमियम मिठाई के लिए काफी कम मानी जाती है.

बर्फी के साथ चाय

दुकान संचालक नरेंद्र राणा लोकल 18 से बताते हैं कि लोग इसे घर ले जाने या रिश्तेदारों को गिफ्ट करने के लिए खूब पसंद कर रहे हैं. यह मिठाई आपको केवल अल्मोड़ा और बागेश्वर में मिलेगी. ये इन दो जगहों की स्पेशल मिठाई है, जिसे पुराने समय में दानपुर की मिठाई कहा जाता था. करीब 100 सालों से भी अधिक समय से बनती आ रही है. कई पर्यटक तो यहां आकर दोपहर की चाय इसी बर्फी के साथ पीना पसंद करते हैं.

चर्चित पहचान

बागेश्वर के प्राकृतिक सौंदर्य, मंदिरों और शांत माहौल के बीच यह मिठाई स्थानीय संस्कृति की एक मीठी पहचान बन चुकी है. यहां आकर अगर आपने ब्राउन बर्फी नहीं खाई, तो निश्चित रूप से आप बागेश्वर का एक बड़ा आकर्षण मिस कर देंगे. यही वजह है कि सोशल मीडिया, ट्रैवल ग्रुप्स और स्थानीय ब्लॉग्स पर भी इस मिठाई की खूब चर्चा होती रहती है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें

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बागेश्वर की ब्राउन बर्फी…100 साल से इसका दबदबा, ये पहाड़ों की काजू कतली

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