फुरकान अंसारी।
हरिद्वार । लम्बे समय से विभिन्न विवादों और कथित अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रहे नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी का एक और मामला अब प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने अपनी पूर्व एक महिला शिक्षिका को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना विभागीय जांच के नाम पर निशाना बनाया।
मामले में महिला शिक्षिका ने विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत के कानूनी मार्गदर्शन में उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के कुछ ही घंटों बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया। विभाग ने कॉलेज प्रबंधन से पूरे प्रकरण पर 15 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब, संबंधित अभिलेख और स्पष्टीकरण तलब कर लिया। पीड़ित शिक्षिका रेनू कुमारी ने बताया कि शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन वर्षों पहले कॉलेज प्रधानाचार्य द्वारा सक्षम स्तर से कराया जा चुका था। इसके बावजूद फर्जी डिग्री का मुद्दा उठाकर उनके खिलाफ अवैध तरीके से एस०आई०टी० एवं विभागीय कार्रवाई शुरू की गई, जिसे प्रताड़ना और पूर्वाग्रहपूर्ण कार्रवाई बताया गया है। और बार-बार उत्पीड़न किया गया। महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि 2022 में कॉलेज द्वारा की गई फर्जी नियुक्तियों में साथ ना देने पर उसका मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया। और उससे अतिरिक्त कॉलेज प्रबंधक द्वारा पैसों की डिमांड की गई। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के तुरंत बाद शिक्षा विभाग की सक्रियता यह संकेत देती है कि पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कॉलेज प्रबंधन विभाग को क्या जवाब देता है और जांच के दौरान विवादित मामलों की कौन-कौन सी नई परतें सामने आती हैं।


