फुरकान अंसारी।

हरिद्वार/पंजाब। इंटरनेट पर वायरल एक प्रेरणादायक घटना के अनुसार, पंजाब के एक गाँव में इंसानियत, हमदर्दी और सामाजिक एकजुटता की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने लोगों का दिल जीत लिया।

 

बताया गया है कि एक ग़रीब व्यक्ति के इंतकाल के बाद जब उनका जनाज़ा जनाज़ागाह पहुँचा और नमाज़-ए-जनाज़ा के लिए सफ़ें दुरुस्त हो गईं, तो इमाम साहब ने मौजूद लोगों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि मरहूम अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। उनके पीछे बेवा पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने जनाज़ागाह के दरवाज़े पर एक चादर बिछाकर लोगों से अपील की कि वे बिना किसी दिखावे के, सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी हैसियत के अनुसार आर्थिक सहयोग करें।

 

प्रचलित जानकारी के मुताबिक़, नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद जब चादर में रखी गई रकम गिनी गई, तो वह एक लाख रुपये से अधिक निकली। किसी ने 10 रुपये, किसी ने 100, किसी ने 500 तो किसी ने 1000 रुपये का सहयोग दिया। लोगों की इसी सामूहिक मदद ने उस बेवा और उसके यतीम बच्चों के लिए कई महीनों का सहारा तैयार कर दिया।

 

यह घटना इस बात का संदेश देती है कि ताज़ियत केवल दुआ करने तक सीमित नहीं, बल्कि मुसीबत की घड़ी में किसी ज़रूरतमंद का हाथ थामने और उसकी मदद करने का नाम भी है। हदीस-ए-मुबारका का मफ़हूम भी यही है कि जो व्यक्ति लोगों के लिए भलाई का ज़रिया बनता है, उसे उसका सवाब मिलता रहता है।

 

यदि यह घटना सत्य है, तो इससे समाज में ज़रूरतमंद, ग़रीब और बेसहारा लोगों की मदद करने की भावना को निश्चित रूप से बल मिलता है।

 

नोट: यह ख़बर इंटरनेट पर प्रसारित जानकारी के आधार पर प्रकाशित की गई है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि हमारा न्यूज़ पोर्टल नहीं करता। हमारा उद्देश्य केवल समाज में इंसानियत, आपसी सहयोग और ज़रूरतमंदों की मदद की भावना को प्रोत्साहित करना है। आइए, हम भी अपनी हैसियत के अनुसार ग़रीब, बेसहारा और ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएँ, क्योंकि किसी की मुश्किल घड़ी में उसका सहारा बनना ही सच्ची इंसानियत और सबसे बड़ी नेकी है।

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