फुरकान अंसारी, संवाददाता।

हरिद्वार, 13 मार्च 2026। पवित्र रमजान उल मुबारक के चौथे जुमे की नमाज ज्वालापुर और आसपास के क्षेत्रों में पूरी अकीदत, श्रद्धा और शांतिपूर्ण माहौल में अदा की गई। ज्वालापुर की प्रमुख मंडी कुएं वाली जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में रोजेदारों ने पहुंचकर जुमे की नमाज अदा की। नमाज की इमामत इमाम कुतुबुद्दीन ने कराई।

जुमे की नमाज से पूर्व तकरीर करते हुए मौलाना इकबाल ने कहा कि रमजान का महीना नेकियों, इबादत और इंसानियत की तरबियत का महीना है। यह महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नुम से निजात पाने का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि रमजान का पहला अशरा रहमतों का और दूसरा अशरा मगफिरत का गुजर चुका है, जबकि अब तीसरा अशरा चल रहा है, जो जहन्नुम से छुटकारे का अशरा माना जाता है।

मौलाना इकबाल ने कहा कि रोजेदारों को चाहिए कि इस अशरे के बचे हुए दिनों में इबादत को और बढ़ाएं, क्योंकि अगर यह कीमती वक्त गफलत में गुजर गया तो यह बड़ी मेहरूमी होगी। अल्लाह तआला इस अशरे में अपने बंदों पर खास रहमतें और बरकतें नाजिल करता है। सहरी से लेकर इफ्तार तक और सुबह सादिक तक अल्लाह की रहमतें बरसती रहती हैं, लेकिन यह उन लोगों के लिए हैं जो रोजा और नमाज की पाबंदी के साथ अल्लाह के हुक्मों पर अमल करते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग रोजा तो रखते हैं, लेकिन नमाज की पाबंदी नहीं करते और बुरी आदतों से भी नहीं बचते। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे अपने दिल को साफ करते हुए अल्लाह की इबादत में लग जाएं और बचे हुए वक्त की कदर करते हुए अपनी इबादत को बढ़ाएं।

मौलाना इकबाल ने ईद की नमाज से पहले सदका-ए-फितर और जकात अदा करने की अहमियत पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि सदका-ए-फितर हर मुसलमान पर फर्ज है और जिसे अल्लाह ने जरूरत से ज्यादा माल दिया है, उसे ईद की नमाज से पहले इसे अदा करना चाहिए, जबकि जकात साल भर में किसी भी समय दी जा सकती है।

नमाज के बाद इमाम कुतुबुद्दीन ने देश की तरक्की, अमन-चैन, भाईचारे और कौम की खुशहाली के लिए खास दुआ कराई।

इस मौके पर मौलाना इकबाल ने यह भी जानकारी दी कि मस्जिद की नई कमेटी ईद के बाद मस्जिद में आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके तहत मस्जिद में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने और एसी (AC) लगाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि मस्जिद में बिजली की व्यवस्था सुचारु रूप से बनी रहे।

उन्होंने कहा कि मस्जिद अल्लाह का घर है और इसकी देखभाल व तरक्की के लिए हर मुसलमान को आगे आकर मदद करनी चाहिए। मस्जिद की इमदाद करना भी एक बड़ा सवाब है और इससे समाज में दीन की मजबूती होती है।

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