हरिद्वार। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बदनपुर बसेई गांव की रहने वाली तमन्ना मलिक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। तीन वर्ष पूर्व उन्होंने अपने गांव के ही युवक अमन त्यागी से प्रेम विवाह किया था और विवाह के बाद अपना नाम बदलकर तुलसी रख लिया। अब कांवड़ यात्रा के दौरान बुर्का पहनकर हरिद्वार से गंगाजल लेने पहुंचने पर वे व्यापक चर्चा का विषय बन गई हैं।
प्रेम विवाह के बाद नई पहचान
बताया जाता है कि विवाह के बाद तुलसी अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। इस बार उन्होंने अपने पति के साथ हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और कांवड़ लेकर “बम-बम भोले” के जयकारों के साथ यात्रा आरंभ की।
हरकी पौड़ी को लेकर उठी बहस
हरिद्वार के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर लगे पोस्टरों के बीच बुर्का पहनकर पहुंची महिला को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कैसे उन्हें वहां प्रवेश मिला। हालांकि प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्होंने शांतिपूर्वक गंगाजल लिया और अपनी यात्रा शुरू की।
समर्थन और आलोचना दोनों
जहां एक वर्ग उनके इस कदम को धार्मिक सौहार्द और व्यक्तिगत आस्था की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है, वहीं कुछ लोग आलोचना भी कर रहे हैं। तुलसी का कहना है कि उनके लिए इंसानियत सर्वोपरि है और वे भगवान शिव की कृपा से ही यह यात्रा कर रही हैं।
पुलिस की निगरानी में उन्होंने अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर संभल स्थित शिवालय में जल अर्पित कर दिया। यह पूरा प्रकरण आस्था, पहचान और सामाजिक दृष्टिकोण पर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

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