लोकेश कुमार पत्रकार 

 

हरिद्वार। मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाओं में शामिल मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान की स्थापना को लेकर गुरुवार को शासन स्तर पर महत्वपूर्ण पहल की गई। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आर.के. सुधांशु ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ ऋषिकुल मैदान का स्थलीय निरीक्षण कर प्रस्तावित परियोजना के लिए उपलब्ध भूमि और आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

 

निरीक्षण के बाद हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) सभागार में आयोजित बैठक में परियोजना की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में भूमि, मूर्ति स्थापना, चारदीवारी, आधारभूत संरचना, मंच निर्माण, पार्किंग और अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

 

प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने बताया कि यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और प्राच्य विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रमुख केंद्र बनेगा। संस्थान में योग, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, भारतीय दर्शन, वैदिक अध्ययन और अन्य प्राच्य विषयों पर शोध, अध्ययन और प्रशिक्षण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

 

उन्होंने संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर पर सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल को नोडल अधिकारी तथा जिला स्तर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

 

बैठक में परियोजना की कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इस अवसर पर सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, सचिव आयुष रंजना राजगुरु, महानिदेशक संस्कृति एवं भाषा युगल किशोर पंत, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

 

प्रस्तावित शोध संस्थान भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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