फुरकान अंसारी।

हरिद्वार ,3 जून 2026।प्रकृति केवल मानव जीवन का आधार नहीं, बल्कि परमात्मा द्वारा प्रदत्त वह अनुपम धरोहर है, जिसकी शीतल छांव में समस्त सृष्टि का अस्तित्व सुरक्षित है। जब मानव ब्रह्मज्ञान से जुड़कर यह अनुभव करता है कि यही प्रकृति परमपिता परमात्मा की सुंदर अभिव्यक्ति है, तब उसका प्रत्येक कर्म संरक्षण, संवर्धन और कृतज्ञता का स्वरूप धारण कर लेता है। किंतु आधुनिकता की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों के असीमित दोहन ने पर्यावरण संतुलन को गंभीर चुनौती दी है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण, प्लास्टिक संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक संकट मानवता के समक्ष उपस्थित हैं। ऐसे समय में ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ केवल एक दिवस नहीं, बल्कि चेतना, दायित्व और सामूहिक संकल्प का दिव्य संदेश बनकर उभरता है।

 

 

 

निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं दिव्य आशीर्वाद से संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा, संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन, संयुक्त राष्ट्र संघ की इस वर्ष की थीम ‘बीट प्लास्टिक पोल्युशन’ के अनुरूप 5 जून, शुक्रवार को संपूर्ण भारतवर्ष के 18 पर्वतीय एवं पर्यटन स्थलों पर विशाल वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन करने जा रहा है। यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रयास नहीं, बल्कि “सेवा, सुमिरण और सद्भाव” के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का एक आध्यात्मिक उपक्रम है।

 

 

 

आज जब संपूर्ण विश्व पर्यावरण संरक्षण हेतु सजग होकर सकारात्मक कदम बढ़ा रहा है, ऐसे समय में संत निरंकारी मिशन अपने सेवा मूल्यों द्वारा समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी में यह संदेश सशक्त कर रहा है कि स्वच्छता केवल बाहरी वातावरण की नहीं, बल्कि विचारों, संस्कारों और जीवनशैली की भी होनी चाहिए। इस महाअभियान में संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के स्वयंसेवक, सेवादल सदस्य, श्रद्धालु एवं स्थानीय निवासी एकजुट होकर “हर कण में प्रभु का दर्शन” की भावना के साथ प्रकृति संरक्षण के इस पुनीत यज्ञ में सहभागी बनेंगे।

 

संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के सचिव आदरणीय श्री जोगिंदर सुखीजा ने जानकारी देते हुए बताया कि मिशन वर्ष 2014 से संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की थीम के अनुरूप निरंतर ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ को सेवा, जागरूकता और जनकल्याण के रूप में मनाता आ रहा है। इसी श्रृंखला में इस वर्ष उत्तराखंड के मसूरी, ऋषिकेश, लैंसडाउन, नैनीताल एवं टिहरी झील; हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली एवं धर्मशाला; गुजरात के सापुतारा; राजस्थान के उदयपुर; महाराष्ट्र के महाबलेश्वर, पंचगनी, खंडाला, लोनावाला, पन्हाला एवं सोमेश्वर; सिक्किम के गैंगटॉक तथा कर्नाटक के नंदी हिल्स सहित 18 प्रमुख स्थलों पर यह अभियान आयोजित किया जाएगा। ये सभी स्थल “हरित चेतना, स्वच्छता साधना और प्लास्टिक-मुक्त भारत” के प्रेरणास्रोत बनेंगे।

 

 

 

कार्यक्रम प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक आयोजित होगा, जिसका शुभारंभ निरंकार प्रभु की सामूहिक प्रार्थना से किया जाएगा। सभी स्वयंसेवक अनुशासन, समर्पण और एकता का दिव्य संदेश देते हुए वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, नुक्कड़ नाटिकाओं एवं जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित करेंगे। पर्यावरण संदेशों से सुसज्जित तख्तियों एवं मानव श्रृंखला के माध्यम से यह संदेश जन-जन तक पहुँचाया जाएगा कि “प्रकृति की सेवा ही प्रभु सेवा है।”

 

 

 

संत निरंकारी मिशन सदैव इस सत्य को जीवन्त करता आया है कि आध्यात्मिकता केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में उतरकर मानवता के कल्याण का माध्यम बननी चाहिए। ‘अमृत प्रोजेक्ट’, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान एवं रक्तदान जैसे अनेकों जनहितकारी प्रयास मिशन की इसी व्यापक सोच के सशक्त उदाहरण हैं। निसंदेह, संत निरंकारी मिशन का यह प्रेरणादायी अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, विनम्रता और जागरूकता से युक्त एक ऐसे उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है, जहाँ आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ, सुरक्षित, संतुलित और हरित धरा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

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