(फुरकान अंसारी)
हरिद्वार,07 मई, 2026।जिला जनगणना अधिकारी श्री पी.आर. चौहान ने अवगत कराया है कि उत्तराखण्ड शासन, सामान्य प्रशासन विभाग (जनगणना) की अधिसूचना दिनांक 04 मई 2026 के क्रम में जनपद हरिद्वार की समस्त जनता से अपील की जाती है कि भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण, मकानों की गणना एवं जनसंख्या गणना कार्य के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों के संबंध में सटीक एवं स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराकर सहयोग प्रदान करें।
जनगणना देश के सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है। इसके माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं, संपत्तियां, साक्षरता, धर्म, आर्थिक गतिविधियां, प्रवासन, प्रजनन क्षमता आदि से संबंधित आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में गांव स्तर तथा शहरी क्षेत्रों में नगर एवं वार्ड स्तर तक उपलब्ध होते हैं।
इन आंकड़ों का व्यापक उपयोग केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा योजनाओं के निर्माण, नीति निर्धारण तथा प्रभावी सार्वजनिक प्रशासन के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त जनगणना आंकड़ों का उपयोग संसदीय, विधानसभा, पंचायत तथा अन्य स्थानीय निकायों के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन एवं आरक्षण हेतु भी किया जाता है। अतः आमजन से अपेक्षा की जाती है कि वे जनगणना कार्य में पूर्ण सहयोग करते हुए सही एवं तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराएं।
जनगणना अधिनियम, 1948 के महत्वपूर्ण प्रावधान
(1) धारा 8 : प्रश्न पूछे जाने एवं उत्तर देने की बाध्यता
जनगणना अधिकारी अपने निर्धारित क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति से केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत प्रश्न पूछ सकता है।
प्रत्येक व्यक्ति अपनी सर्वोत्तम जानकारी एवं विश्वास के अनुसार सही उत्तर देने के लिए बाध्य होगा।
विशेष प्रावधान :
किसी व्यक्ति को अपने परिवार की किसी महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
कोई महिला अपने पति, मृत पति अथवा ऐसे व्यक्ति का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं होगी, जिसका नाम बताना प्रचलित सामाजिक परंपराओं के विरुद्ध हो।
(2) धारा 9 : जनगणना अधिकारी को प्रवेश एवं चिन्हांकन की अनुमति
किसी घर, परिसर, जलयान अथवा अन्य स्थान का अधिभोगी जनगणना अधिकारी को आवश्यकतानुसार प्रवेश की अनुमति देगा तथा जनगणना कार्य हेतु लगाए जाने वाले अक्षर, चिन्ह अथवा संख्यांक अंकित करने या लगाने की अनुमति प्रदान करेगा।
(3) धारा 10 : अनुसूची भरने संबंधी प्रावधान
जनगणना अधिकारी किसी गृह, वाणिज्यिक अथवा औद्योगिक प्रतिष्ठान के अधिभोगी, प्रबंधक या अधिकारी को निर्धारित अनुसूची उपलब्ध करा सकता है।
संबंधित व्यक्ति को अपने परिवार अथवा अधीनस्थ व्यक्तियों की जानकारी सही रूप से भरकर हस्ताक्षर सहित जनगणना अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी।
(4) धारा 11 : दंड एवं शास्तियां
निम्न स्थितियों में संबंधित व्यक्ति दंड का भागी होगा—
जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करना।
जनगणना अधिकारी के कार्य में सहयोग न करना।
जानबूझकर गलत जानकारी देना।
सही जानकारी देने से इंकार करना।
जनगणना अधिकारी को प्रवेश से रोकना।
लगाए गए चिन्हों या संख्याओं को हटाना, मिटाना या क्षति पहुंचाना।
अनुसूची भरने में लापरवाही या मिथ्या विवरण देना।
जनगणना कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश करना।
दंड प्रावधान :
ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
गंभीर मामलों में तीन वर्ष तक का कारावास भी हो सकता है।
अपराध के दुष्प्रेरण पर भी एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
(5) धारा 15 : जनगणना अभिलेखों की गोपनीयता
जनगणना अधिकारी द्वारा तैयार किए गए अभिलेख, रजिस्टर, पुस्तिकाएं अथवा अनुसूचियां पूर्णतः गोपनीय रहेंगी। किसी भी व्यक्ति को उनका निरीक्षण करने का अधिकार नहीं होगा।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत भी जनगणना अभिलेखों को किसी सिविल अथवा दांडिक कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकेगा, सिवाय जनगणना अधिनियम के अंतर्गत अपराध से संबंधित मामलों के।
जिला प्रशासन हरिद्वार द्वारा जनहित में जारी


