फुरकान अंसारी संवाददाता।
हरिद्वार। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती के अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले एक महान समाज सुधारक, नारी शिक्षा के अग्रदूत, प्रखर लेखक और सामाजिक समानता के सशक्त समर्थक थे।
उन्होंने कहा कि ज्योतिबा फुले जी का उद्देश्य समाज में समानता, न्याय और शिक्षा के अधिकार को बढ़ावा देना था। उन्होंने उस सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दी, जिसमें जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव किया जाता था। फुले जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन उन वंचित, शोषित और पीड़ित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया, जिनकी आवाज़ लंबे समय तक दबाई जाती रही।
सुनील सैनी ने कहा कि महात्मा फुले का दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही समाज में परिवर्तन की कुंजी है। इसी विचार को साकार करते हुए उन्होंने 1848 में पुणे में पहली बालिका विद्यालय की स्थापना की, जिससे महिलाओं और दलित वर्ग को शिक्षा का अधिकार मिला। उनका यह कदम न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक था, बल्कि इससे समाज में नई जागरूकता का भी संचार हुआ।
उन्होंने समाज में चेतना फैलाने के लिए अपने लेखन और भाषणों का व्यापक उपयोग किया। उनकी रचनाओं ने लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रेरित किया।
सुनील सैनी ने आगे कहा कि फुले जी महिलाओं को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि सशक्त महिला ही सशक्त समाज का निर्माण करती है, और इसी उद्देश्य से उन्होंने महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अंत में उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले का सपना एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहाँ सभी को समान अधिकार मिले, जाति और वर्ग का भेद समाप्त हो, और हर व्यक्ति को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि एकजुट होकर संघर्ष करने से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
आपका सम्पूर्ण जीवन नारी उत्थान एवं समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित रहा। आपके विचार हमें सदैव एक भेदभाव रहित, समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।


