(फुरकान अंसारी)
हरिद्वार,31 जनवरी 2026। श्रवण नाथ नगर स्थित श्री अमर धाम में परम पूज्य गुरुदेव साकेतवासी श्री माधव दास जी महाराज की पावन पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और अटूट समर्पण का अद्भुत एवं अलौकिक दृश्य देखने को मिला। यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा की गहन भावना और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर उभरा।
विशाल संत भंडारे से जीवंत हुई गुरु–शिष्य परंपरा
गुरुदेव की पावन स्मृतियों को चिरस्थायी बनाए रखने हेतु एक विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें संत समाज एवं भक्तों की अपार उपस्थिति रही। माता रानी वैष्णो देवी की असीम अनुकंपा से संपन्न इस पवित्र आयोजन का मुख्य संकल्प समस्त भक्तजनों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करना रहा।
माता रानी का पूजन एवं भजन–सत्संग से आलोकित हुआ परिसर
श्री महंत शत्रुघ्न दास जी महाराज के पावन एवं दिव्य सानिध्य में माता रानी वैष्णो देवी की पावन प्रतिमा का विधिवत पूजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात आयोजित भजन–सत्संग ने संपूर्ण परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा, गुरु–भक्ति और दिव्य चेतना से आलोकित कर दिया।
भगवान राम का जीवन दर्शन मानवता का पथप्रदर्शक
— श्री महंत शत्रुघ्न दास जी महाराज
इस गरिमामयी अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं और संत समाज को संबोधित करते हुए श्री महंत शत्रुघ्न दास जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन दर्शन पर भावपूर्ण प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा—
“भगवान राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति हैं। उनकी मर्यादा, करुणा और धर्मनिष्ठा आज भी मानवता को दिशा प्रदान करती है। प्रभु राम की शरण में जाने वाला कोई भी भक्त कभी रिक्त नहीं रहता।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार भगवान राम की कृपा से जीवन कल्याणमय बनता है, उसी प्रकार माता रानी वैष्णो देवी की अपार कृपा भक्तों के जीवन को सार्थकता की ओर ले जाती है।
गुरुदेव ज्ञान के विशाल सूर्य थे
— श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज
श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज ने कहा कि—
“भगवान राम का संपूर्ण चरित्र हमारी सनातन संस्कृति की वह गौरवशाली धरोहर है, जो प्रेम, धैर्य और करुणा का संदेश देती है। परम पूज्य गुरुदेव माधव दास जी महाराज इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान के एक विशाल सूर्य के समान थे।”
गुरु का आशीर्वाद भवसागर से पार लगाता है
आयोजन के दौरान सेवा का भाव अत्यंत प्रगाढ़ दिखाई दिया। संतों की सेवा में जुटे भक्तों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं गुरुदेव अपनी सूक्ष्म उपस्थिति से सभी को आशीष प्रदान कर रहे हों।
महाराज जी ने कहा—
“गुरु का आशीर्वाद ही वह नौका है, जो भक्त को भवसागर से पार लगाती है।”
पुण्यतिथि आत्मचिंतन का अवसर
— बाबा हठ योगी महाराज
इस अवसर पर बाबा हठ योगी महाराज ने कहा कि पुण्यतिथि आत्मचिंतन एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। गुरुजनों की पावन स्मृतियां हमारे हृदय और मन-मस्तिष्क पर सदैव उनकी कृपा की छाया बनाए रखती हैं।
सेवा, सत्य और समर्पण के पथ पर चलने का संकल्प
प्रसाद ग्रहण करते हुए श्रद्धालुओं ने यह संकल्प लिया कि वे गुरुदेव द्वारा दिखाए गए सेवा, सत्य और धर्म के मार्ग का आजीवन अनुसरण करेंगे। भक्ति और वैराग्य के इस अनुपम संगम ने श्री अमर धाम के कण–कण को ऊर्जावान बना दिया और धर्मनगरी हरिद्वार की पवित्र धरा को और भी अधिक वंदनीय बना दिया।
ये रहे प्रमुख संत-महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर
बाबा हठ योगी महाराज,
महंत दुर्गादास महाराज,
महंत प्रहलाद दास महाराज,
महंत हितेश दास महाराज,
महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज,
महंत रघुवीर दास महाराज,
साध्वी महंत राघव दास महाराज,
महंत बिहारी शरण महाराज,
महंत प्रेमदास महाराज,
महंत हरिदास महाराज,
मधुसाध्वी माता विमला देवी,
पंडित श्री राकेश उपाध्याय,
स्वामी हरिदास महाराज,
महंत रवि देव महाराज,
कोतवाल धर्मदास महाराज,
कोतवाल कमल मुनि महाराज (देहरादून),
बाबा रमेशानन्द महाराज
सहित बड़ी संख्या में संत महापुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।


