(फुरकान अंसारी)

हरिद्वार। मानव जीवन को मृत्यु के बाद भी उपयोगी और सार्थक बनाने वाले महादान के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से दधीचि देहदान समिति (रजि.), हरिद्वार द्वारा तृतीय महर्षि दधीचि स्मृति यज्ञ का आयोजन दिनांक 18 जनवरी 2026, प्रातः 9:30 से 11:30 बजे तक, आर्य समाज मंदिर, सेक्टर–1, बी.एच.ई.एल., हरिद्वार में श्रद्धा, गरिमा एवं अत्यंत सकारात्मक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

“परहित सरिस धर्म नहीं भाई”

गरिमामय उपस्थिति ने बढ़ाया आयोजन का गौरव

कार्यक्रम में लगभग 120 नागरिकों की गरिमामय उपस्थिति रही। विशेष रूप से 2 देहदानियों के परिवार एवं 8 नेत्रदानियों के परिवार स्वयं उपस्थित रहकर समाज के समक्ष प्रेरणादायक उदाहरण बने।

इसके अतिरिक्त लगभग 70 ऐसे परिवार, जिन्होंने पूर्व में नेत्रदान एवं अंगदान का संकल्प लिया था, पूरे कार्यक्रम में उत्साह, आस्था एवं प्रसन्नचित भाव के साथ सम्मिलित रहे। संपूर्ण परिसर में सेवा, संतोष, कर्तव्यबोध एवं मानवीय चेतना का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था।

यज्ञ से जागा त्याग और सेवा का भाव

इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मा भरत मुनि जी (उपनाम – भूपेंद्र खन्ना) द्वारा विधिपूर्वक यज्ञ संपन्न कराया गया। मंत्रोच्चारण एवं यज्ञ प्रक्रिया के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि मनुष्य का जीवन केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए होता है।

यज्ञ ने उपस्थित जनसमुदाय को त्याग, सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलने की गहरी प्रेरणा प्रदान की।

प्रेरक विचारों से सुसज्जित मंच

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं समिति के संरक्षक श्री रोहिताश कुंवर

(पूर्व प्रधानाचार्य, ज्वालापुर इंटर कॉलेज एवं विभाग संपर्क प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने कहा—

“नर सेवा ही नारायण सेवा है। मृत्यु के पश्चात शरीर हमारे किसी काम का नहीं रहता, किंतु वही शरीर किसी के जीवन में प्रकाश, किसी के लिए ज्ञान और किसी के लिए आशा बन सकता है। महर्षि दधीचि का त्याग हमें सिखाता है कि समाज के लिए दिया गया दान ही सच्ची अमरता है।”

मुख्य अतिथि डॉ. दीनदयाल वेदालंकार (गुरुकुल महाविद्यालय, हरिद्वार) ने कहा—

“जिस दिन मनुष्य यह समझ लेता है कि यह शरीर मेरा नहीं है, उसी दिन नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान का भाव स्वतः जागृत हो जाता है। यह दान नहीं, बल्कि समाज के प्रति अंतिम और सर्वोच्च कर्तव्य है।”

चिकित्सकों ने बताया देहदान का सामाजिक महत्व

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जगजीतपुर के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग ने कहा कि देहदान से प्राप्त कैडैवर मेडिकल छात्रों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक होते हैं, जिससे भविष्य के चिकित्सक बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर समाज की सेवा कर पाते हैं।

एम्स ऋषिकेश से आईं प्रोफेसर डॉ. रश्मि मल्होत्रा ने भी देहदान की आवश्यकता पर बल देते हुए समिति के निस्वार्थ प्रयासों की सराहना की।

बी.एच.ई.एल. अस्पताल के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एस. कुशवाहा ने इस जनजागरूकता अभियान को अद्भुत बताते हुए भविष्य में समिति से सक्रिय रूप से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की।

समिति की प्रेरक यात्रा

समिति के अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र चाँदना ने समिति की स्थापना से लेकर अब तक किए गए कार्यों, संपन्न देहदान, नेत्रदान एवं भरे गए संकल्प पत्रों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह सब सामूहिक संकल्प, निरंतर प्रयास और टीम भावना से ही संभव हो पाया है।

कार्यक्रम का कुशल संचालन समिति के महासचिव श्री राजीव माहेश्वरी द्वारा किया गया।

समापन

कार्यक्रम के अंत में शांति पाठ के साथ सभी के स्वस्थ, प्रसन्न एवं सेवा-भाव से युक्त जीवन की कामना की गई तथा प्रसाद स्वरूप जलपान कराया गया।

संपर्क सूत्र

यदि कोई भी नागरिक नेत्रदान, अंगदान अथवा देहदान का संकल्प लेना चाहता है या इस पुनीत सेवा से जुड़ना चाहता है, तो निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकता है—

📞 मोबाइल:

94103 2658

94111 1675

94103 95622

— दधीचि देहदान समिति (रजि.), हरिद्वार, उत्तराखंड

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