फुरकान अंसारी।
हरिद्वार/मसूरी। उत्तराखंड के मसूरी स्थित लक्ष्मणपुरी क्षेत्र में प्रशासन ने सरकारी एवं नगर पालिका की भूमि पर बने एक धार्मिक ढांचे को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित ढांचा बिना अनुमति के सरकारी भूमि पर निर्मित था, जिसे अवैध अतिक्रमण मानते हुए नियमानुसार कार्रवाई की गई।
प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई से पहले राजस्व अभिलेखों एवं भूमि की स्थिति का परीक्षण किया गया, जिसके बाद निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई।
वहीं, स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। समुदाय के लोगों का कहना है कि संबंधित स्थल लगभग 200 वर्ष पुरानी कब्रगाह से जुड़ा अंतिम नमाज़ (जनाज़ा नमाज़) का स्थान था, जहां लंबे समय से धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता रहा है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
इस मामले में उत्तराखंड वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष सादाब शम्स ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारियों को ऐसे मामलों में पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा बनने की होड़ में किसी भी समुदाय की धार्मिक आस्था को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए तथा ऐसे मामलों का समाधान सभी पक्षों को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन अपने निर्णय को नियमानुसार की गई कार्रवाई बता रहा है, जबकि स्थानीय समुदाय मामले में अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहा है।
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