फुरकान अंसारी।
हरिद्वार,30/05/2026।भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट लाने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI की बोर्ड बैठकों में इस प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है और जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। शुरुआती चरण में ₹100, ₹200 और ₹500 के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले वर्ष 2012 में ₹10 के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल देश के 5 शहरों में किया गया था, लेकिन एटीएम मशीनों में तकनीकी दिक्कतों के चलते उस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब नई तकनीक और अपग्रेडेड एटीएम सिस्टम के साथ इस योजना को फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
प्लास्टिक नोट लाने के मुख्य कारण
– लंबी उम्र: प्लास्टिक नोट कागजी नोटों की तुलना में 4 से 5 गुना अधिक समय तक चलते हैं।
– पानी और गंदगी से सुरक्षा: ये नोट जल्दी खराब नहीं होते और पानी में भीगने पर भी सुरक्षित रहते हैं।
– कम खर्च: बार-बार नोट छापने और बदलने की जरूरत कम होने से लंबे समय में लागत घटेगी।
– बेहतर गुणवत्ता: प्लास्टिक नोट जल्दी फटते नहीं हैं और उनकी चमक भी लंबे समय तक बनी रहती है।
मौजूदा समय में देश में इस्तेमाल हो रहे कागजी नोट जल्दी खराब हो जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में करीब 23.80 बिलियन खराब नोटों को नष्ट करना पड़ा था। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर RBI का खर्च बढ़कर ₹6,372.80 करोड़ तक पहुंच गया।
हालांकि देश में डिजिटल पेमेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी की मांग अब भी काफी अधिक है। वर्तमान में देश में करीब 42.86 ट्रिलियन रुपये की नकदी सर्कुलेशन में बताई जा रही है। ऐसे में प्लास्टिक नोटों की शुरुआत भारतीय मुद्रा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में पहले से ही पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इन्हें अधिक टिकाऊ व सुरक्षित माना जाता है।
नोट: यह जानकारी सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। आधिकारिक पुष्टि के लिए RBI की घोषणा का इंतजार किया जाना चाहिए।


