फुरकान अंसारी संवाददाता।
हरिद्वार, 15 अप्रैल 2026।मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अवगत कराया है कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में प्राचीन पाण्डुलिपियाँ, ताड़पत्र, भोजपत्र एवं दुर्लभ अभिलेख हमारी समृद्ध ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक चेतना के अमूल्य साक्ष्य हैं। इन पाण्डुलिपियों एवं ग्रन्थों का संरक्षण कर उन्हें भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य देश की समृद्ध ज्ञान परम्परा और बौद्धिक विरासत का पुनर्जीवन करना है। इस मिशन के अंतर्गत देशभर में उपलब्ध पाण्डुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रन्थों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है, ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखण्ड, जो प्राचीन ज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि रहा है, इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मिशन ‘विकसित भारत @ 2047’ के अंतर्गत डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण तथा विरासत और विकास के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ा हुआ है।
इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों, हस्तलिखित ग्रन्थों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों एवं अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण किया जाएगा।
इस संबंध में उन्होंने सभी से अपेक्षा की है कि यदि किसी के पास पाण्डुलिपियों की मूल प्रति या संरक्षित छायाप्रति उपलब्ध है, तो उसे जिला सूचना कार्यालय, देवपुरा चौक, हरिद्वार में उपलब्ध कराएं, जिससे इन पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा सके। डिजिटाइज्ड पाण्डुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ के माध्यम से आमजन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।


