फुरकान अंसारी, संवाददाता।

फतेहगढ़ साहिब, पंजाब: राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब हिंदुस्तानी पसमांदा मंच द्वारा आयोजित ‘एक हिंद एवं ईद मिलन समारोह’ ने हजारों लोगों को एक सूत्र में बांध दिया। डॉ. इंद्रेश कुमार के प्रेरक मार्गदर्शन और राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद शमशाद मीर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने राष्ट्र प्रथम की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में संकल्प लिया— “हम भारत के लिए जिएंगे और भारत के लिए ही मरेंगे।”

📍 सरकार से प्रमुख मांग: ‘पसमांदा बोर्ड’ का गठन

राष्ट्रीय संयोजक शमशाद मीर ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पसमांदा समाज के विकास हेतु एक विशेष ‘पसमांदा बोर्ड’ के गठन की मांग रखी। उन्होंने कहा कि दशकों से उपेक्षित इस वर्ग को अब मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने भारत को वैश्विक स्तर पर शांति और नेतृत्व का प्रतीक बनाने की भी बात कही।

💰 आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अरशद खान ने समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही सशक्त राष्ट्र की नींव है और पारदर्शिता व ईमानदारी के साथ पसमांदा समाज देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

🎤 प्रमुख वक्ताओं के विचार

राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. जावेद चारण ने कहा कि अब समय आ गया है जब पसमांदा समाज अपनी पहचान और अधिकारों के लिए मजबूती से आगे बढ़े।

राष्ट्रीय सहसंयोजक दानिश मलिक ने आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ एकजुट होकर खड़े रहने का आह्वान किया और तिरंगे को अपनी पहचान बताया।

नौशाद खान ने शिक्षा को पिछड़ेपन से मुक्ति का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए सरकार से सहयोग की अपील की।

🚩 सामूहिक संकल्प: नशा और कट्टरपंथ मुक्त भारत

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे नशा मुक्त, दंगा मुक्त और आतंकवाद मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। साथ ही भारतीय संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की रक्षा का संकल्प भी दोहराया गया।

🤝 संगठन का विस्तार और मिशन 2027

राष्ट्रीय सलाहकार बाबा भुट्टे शाह साबरी, प्रदेश पदाधिकारियों और अन्य कार्यकर्ताओं ने इस विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि पसमांदा समाज अब केवल एक वोट बैंक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त ताकत है।

यह ऐतिहासिक आयोजन ‘मिशन 2027’ की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को हर नागरिक तक पहुंचाना है।

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