(फुरकान अंसारी)
हरिद्वार, 1 फरवरी 2026। निर्मला छावनी स्थित भगवान रविदास आश्रम में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आश्रम परिसर में भक्ति, समरसता और सामाजिक एकता का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान रविदास जी के जीवन, विचारों और समाज सुधारक भूमिका पर प्रकाश डाला। पूर्व बार अध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि भगवान श्री रविदास जी महाराज भारतीय संत परंपरा के महान संत, समाज सुधारक और भक्त कवि थे। उनका जन्म लगभग पंद्रहवीं शताब्दी में काशी नगरी में एक साधारण परिवार में हुआ। उन्होंने भक्ति, समानता और मानवता का संदेश दिया तथा जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों का दृढ़ता से विरोध किया। “मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसे उनके वचन आज भी आत्मशुद्धि और सच्चे कर्मों की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने बताया कि संत रविदास जी की वाणी सरल, प्रभावशाली और भावपूर्ण थी। उनके भजन और पद आज भी गुरु ग्रंथ साहिब सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में सम्मिलित हैं। उन्होंने कर्म को सच्ची पूजा और मानव सेवा को ईश्वर सेवा के समान बताया।
इस अवसर पर लकी ने कहा कि भगवान रविदास जी महाराज का जीवन त्याग, साधना और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है। उनकी जयंती हमें प्रेम, समानता और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
श्रीपाल सिंह ने कहा कि संत रविदास जी के उपदेश सदैव मानवता के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। वहीं श्री टिंकू ने कहा कि भगवान रविदास हमारे हृदय में वास करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलकर हम अपने जीवन को सार्थक बना रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने संत रविदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।


