(फुरकान अंसारी)
हरिद्वार/मुजफ्फरनगर,समाज की रूढ़िवादी मान्यताओं को चुनौती देते हुए और मानवता का धर्म निभाते हुए,क्रांतिकारी शालू सैनी ने एक बार फिर दुनिया को इंसानियत की नई परिभाषा दिखाई है। मुजफ्फरनगर के खतौली स्थित झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले एक बेसहारा बुजुर्ग की मृत्यु के बाद, शालू सैनी ने न केवल उन्हें एक बेटी की तरह कंधा दिया, बल्कि पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार कर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया।
क्रांतिकारी शालू सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि खतौली की झुग्गी-झोपड़ी में एक बुजुर्ग लंबे समय से बेसहारा और बीमार अवस्था में जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनके निधन के बाद जब शव को अंतिम संस्कार के लिए अपनों की दरकार थी, तब कोई आगे नहीं आया। सूचना मिलते ही क्रांतिकारी शालू सैनी तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने न केवल शव को सम्मान दिया, बल्कि एक पुत्र और पुत्री के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए स्वयं अर्थी को कंधा दिया और खतौली श्मशान घाट तक ले गईं।बेटे के दायित्व को निभाते हुए अपने हाथों से मुखाग्नि देकर समाज को बताया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है
अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें उस वक्त नम हो गईं जब शालू सैनी ने श्मशान घाट की मर्यादाओं और समाज की पुरानी सोच को दरकिनार कर एक बेटे का धर्म निभाया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “कोई भी इंसान तब तक बेसहारा नहीं है जब तक समाज में मानवता जीवित है। लोग कहते हैं कि बेटियां श्मशान नहीं जातीं, लेकिन मैंने यह संकल्प लिया है कि किसी भी लावारिस या बेसहारा शव को लाचारी में नहीं छोड़ूंगी। हर बेसहारा की बेटी बनकर उन्हें सम्मानजनक विदाई देना ही मेरा असली धर्म है।”
क्रांतिकारी शालू सैनी को इस साहसी और मानवीय सेवा को करते हुए कई वर्ष हो गए है और वो अब तक करीब 6000 हजार अंतिम संस्कार व अस्थि विसर्जन अपने हाथों से कर चुकी है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी धर्मों के धर्मानुसार अपने हाथों से निभाती है बेटे का दायित्व जनपद में प्रशंसा हो रही है। क्रांतिकारी शालू सैनी साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष है और वो जनता से सहयोग मांगकर इन सेवाओं को करती है उन्होंने जनता से अपील भी की है कि लकड़ी घी कफन सामग्री एम्बुलेंस गाड़ी से उनकी मदद जरूर करे ताकि हर मृतक को सम्मानजनक अंतिम बिदाई मिल सके शालू सैनी पिछले कई वर्षों से लावारिस व बेसहारा शवों के अंतिम संस्कार और बुजुर्गो की सेवा में तन मन धन से लगी है । शालू सैनी, जिन्हें ‘क्रांतिकारी’ के नाम से जाना जाता है,
​इस मौके पर स्थानीय निवासी उपस्थित रहे,जिन्होंने शालू सैनी के इस जज्बे को सलाम किया

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