फुरकान अंसारी।
हरिद्वार, 28 मई 2026। ज्वालापुर शहर में ईद-उल-अजहा का पर्व धार्मिक आस्था, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल के बीच बड़ी अकीदत के साथ मनाया गया। ईदगाह में मौलाना अब्दुल वाहिद ने ईद-उल-अजहा की नमाज अदा कराई। नमाज के दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने देश में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगीं।
पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। ईदगाह और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल के साथ अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती रही। सुरक्षा व्यवस्था के बीच नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे मिल कर ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे, प्रेम एवं सौहार्द का संदेश दिया। इस अवसर पर ईदगाह कमेटी की ओर से बेहतर व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया।
इस बार देश के कई जगह पर कुछ मुस्लिम संगठनों के बैनर तले “गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करो” की मांग भी उठाई गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है तथा उसकी सुरक्षा और सम्मान के लिए समाज को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने सामाजिक सौहार्द, आपसी सम्मान और भाईचारे को मजबूत बनाए रखने का संदेश भी दिया।
ईदगाह कमेटी के सदर हाजी जमशेद खान ने कहा कि, “ईद-उल-अजहा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि कुर्बानी, त्याग और इंसानियत का पैगाम देने वाला मुकद्दस पर्व है। यह दिन हमें हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस महान सुन्नत की याद दिलाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने की तैयारी दिखाई थी। कुर्बानी का असल मकसद केवल जानवर की कुर्बानी नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद घमंड, जलन, नफरत और बुरी सोच जैसी कमजोरियों को खत्म करना भी है।”
उन्होंने सभी देशवासियों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) की दिली मुबारकबाद देते हुए आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।


