फुरकान अंसारी।
हरिद्वार, 22 अक्टूबर 2026। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने अवगत कराया कि जिलाधिकारी हरिद्वार श्री मयूर दीक्षित के निर्देशों के क्रम में जनपद में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा दोपहिया वाहनों के अवैध संचालन पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा आज विद्यालयों एवं उनके आसपास के क्षेत्रों में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया गया।
उन्होंने अवगत कराया कि यह अभियान सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) हरिद्वार श्रीमती नेहा झा के नेतृत्व में संचालित किया गया। अभियान में सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) हरिद्वार श्री निखिल शर्मा तथा परिवहन कर अधिकारी श्रीमती वरुणा सैनी भी उपस्थित रहीं।
अभियान के दौरान विभिन्न विद्यालयों के आसपास की सड़कों, गलियों एवं पार्किंग स्थलों पर खड़े दोपहिया वाहनों की जाँच की गई। विशेष रूप से ऐसे वाहनों को चिह्नित किया गया, जिनका उपयोग विद्यालयों में अध्ययनरत नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा किए जाने की संभावना पाई गई।
*वाहन स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी*
जाँच के दौरान विद्यालयों के आसपास खड़े पाए गए संदिग्ध वाहनों के पंजीकृत स्वामियों को परिवहन विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
नोटिस के माध्यम से वाहन स्वामियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित वाहन विद्यालय के समीप किस व्यक्ति द्वारा लाया गया था, वाहन चलाने वाले व्यक्ति की आयु क्या थी तथा क्या उसके पास संबंधित श्रेणी का वैध ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध था।
साथ ही यह भी स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं कि यदि वाहन का उपयोग किसी नाबालिग द्वारा किया गया था, तो उसे वाहन किस व्यक्ति द्वारा एवं किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराया गया।
वाहन स्वामियों को तीन दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण एवं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जाँच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
*विद्यालय प्रबंधन को भी दिए गए सख्त निर्देश*
अभियान के दौरान विद्यालय प्रबंधन को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए कि विद्यालय परिसर में नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा लाए जाने वाले मोटरसाइकिल, स्कूटी अथवा अन्य मोटर वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध न कराई जाए।
विद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया गया कि वह ऐसे छात्र-छात्राओं की पहचान करे जो बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के दोपहिया वाहनों से विद्यालय आते हैं तथा उनके अभिभावकों को तत्काल सूचित करते हुए भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने हेतु आवश्यक कदम उठाए।
इसके अतिरिक्त विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया गया कि छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों को सड़क सुरक्षा नियमों, न्यूनतम वैधानिक आयु तथा बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन संचालन के कानूनी परिणामों के संबंध में जागरूक किया जाए।
*नाबालिग को वाहन उपलब्ध कराने पर अभिभावकों एवं वाहन स्वामियों की भी तय होगी जिम्मेदारी*
परिवहन विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत निर्धारित आयु एवं लाइसेंस संबंधी शर्तों का उल्लंघन कर वाहन चलाना दंडनीय अपराध है।
विशेष रूप से मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के अंतर्गत किशोर द्वारा मोटर वाहन संबंधी अपराध किए जाने की स्थिति में, अधिनियम में निर्धारित शर्तों के अधीन वाहन स्वामी अथवा अभिभावक के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अंतर्गत तीन वर्ष तक के कारावास एवं ₹25,000 के जुर्माने का प्रावधान है।
अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल अथवा स्कूटी चलाने के लिए उपलब्ध न कराएँ। ऐसा करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों एवं सड़क पर चलने वाले अन्य व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
*सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं, अभियान रहेगा जारी*
सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) श्रीमती नेहा झा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन की रोकथाम के लिए विद्यालयों के आसपास नियमित रूप से प्रवर्तन अभियान संचालित किए जाएँगे।
सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्री निखिल शर्मा ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि विद्यालय प्रबंधन, अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। वाहन स्वामियों से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
परिवहन विभाग द्वारा सभी विद्यालय प्रबंधनों एवं अभिभावकों से अपील की गई है कि नाबालिगों द्वारा अवैध वाहन संचालन को रोकने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि संभावित सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके तथा छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


