शस्त्र पूजन एवं विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सामाजिक समरसता का दिया संदेश; पूर्व जिला संघचालक रोहिताश्व कुँवर चौहान ने प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का किया आह्वान।
फुरकान अंसारी।
हरिद्वार, 18 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस एवं विजयादशमी के पावन अवसर पर चाणक्य शाखा, हरिद्वार क्षेत्र की ओर से शस्त्र पूजन एवं भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। आर्यनगर कॉलोनी, नंदपुरी कॉलोनी और मयूर विहार कॉलोनी क्षेत्र में पूर्ण गणवेश में निकले स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठनात्मक एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया। पथ संचलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पथ संचलन के दौरान क्षेत्र में उत्सव और देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों ने विभिन्न स्थानों पर देशभक्ति गीतों और पुष्पवर्षा के साथ स्वयंसेवकों का स्वागत किया। एकरूप गणवेश में अनुशासित कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, सेवा, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।
शस्त्र पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर विजयादशमी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि विजयादशमी सत्य और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। इसी पावन तिथि पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी, इसलिए संघ के स्वयंसेवकों के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है।
प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं पूर्व जिला संघचालक रोहिताश्व कुँवर चौहान ने प्रभु श्रीराम के जीवन, आदर्शों, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यपरायणता का उल्लेख करते हुए स्वयंसेवकों से उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करने, समाज के प्रति दायित्वों को समझने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लेने का पर्व है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, न्याय, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
श्री चौहान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, उसकी विचारधारा और संगठनात्मक कार्यपद्धति पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। सेवा, संस्कार, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना प्रत्येक स्वयंसेवक का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।
उन्होंने संघ के मूल भाव ‘इदं राष्ट्राय, इदं न मम’ अर्थात यह राष्ट्र के लिए है, मेरे लिए नहीं, का उल्लेख करते हुए स्वयंसेवकों से राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने आचरण से राष्ट्रभक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करने की अपील की।
संगठनात्मक एकता और सेवा भावना पर दिया जोर
कार्यक्रम में नगर संघचालक एवं अधिवक्ता ज्ञानेश्वर ठकराल ने स्वयंसेवकों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने, सामाजिक जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने और राष्ट्रसेवा के कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक होना चाहिए। प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने विचारों, व्यवहार और कार्यों से समाज में सकारात्मकता का प्रसार करने के साथ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देना चाहिए।
देशभक्ति गीत और अमृत वचन ने बांधा समां
कार्यक्रम में मुख्य शिक्षक की भूमिका अमरेश कुमार ने निभाई, जबकि शाखा कार्यवाह राजेन्द्र रूहेला ने मंच का परिचय प्रस्तुत किया। डॉ. अश्वनी ने एकल गीत प्रस्तुत किया और प्रिय पराक्ष ने अमृत वचन का वाचन किया। संपूर्ण कार्यक्रम अनुशासन, गरिमा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर बस्ती प्रमुख ब्रह्मपाल, सह बस्ती प्रमुख वेदपाल, व्यवस्था प्रमुख देवी प्रसाद, पार्षद पति सतेन्द्र चौधरी, धनवीर, डॉ. सुधीर रूहेला, सतीश गोला, सतीश चौहान, सतीश गुप्ता, सतीश त्यागी, नगर संपर्क प्रमुख सुशील सैनी, अभिषेक त्यागी, पार्षद आकाश चौहान, पार्षद अनुज सिंह, प्रमोद चौहान, प्रमोद त्यागी, ब्रजकिशोर, सुभाष, होशियार सिंह, अशोक गुप्ता, अभिनव, मानस गोयल, डॉ. मोहित, उपनगर शारीरिक प्रमुख उमेश मिश्रा, नगर कार्यवाह डॉ. अनुराग, डॉ. आलोक, सत्यप्रकाश, ओमप्रकाश, विनोद शर्मा, कार्तिक, अतुल चौहान, विशाल राठौर और दीपक राजपूत सहित अनेक स्वयंसेवक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को स्मरण करने के साथ स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और कर्तव्यबोध की भावना को सुदृढ़ करना रहा। पथ संचलन का समापन राष्ट्रसेवा, संगठनात्मक एकता और समाज के प्रति समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।


